Monday, April 4, 2011

मगरूर मंजिल नहीं मिलती डरपोकों से

आंधी  तो  होती ही  है  उड़ाने  के  लिए 
बिजली  तो  होती  ही  है  चेताने  के  लिए 
अँधेरा  होता  ही  है  डराने  के  लिए 
धूप  होती ही  है  जलाने  के  लिए 

कदम  रुक  जाये  चलते  चलते  गर 
क्या  होगा  आगे  यह  सोच  कर 
भूल  न  जाना  कभी  राह  में 
मगरूर  मंजिल  नहीं  मिलती  डरपोकों  से 

कांटे  तो  होते  ही  हैं  चुभने  के  लिए 
चोट  भी  होती ही  हैं  दुखने  के  लिए 
कोहरा  तो  होता  ही  है  छाने  के  लिए 
और  घटायें  पानी  बरसाने  के  लिए 

थक  जाओ  गर  मुश्किलों  से  लढते  लढते 
रुक  जाओ  गर  कभी  आगे  बढ़ते  बढ़ते 
भूल  न  जाना  कभी  राह  में 
मगरूर  मंजिल  नहीं  मिलती  डरपोकों  से  

अपना अनुभव ज़रूर बतायें

3 comments:

  1. Hey I wanted more of this rhyme. Well m going 2 deliver dis song wen asked 2 sing in any farewell only if u permit. Jokes apart, thanks a ton 4 gearing up d relaxed nerves.

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  2. Permission granted.. Anything for my love. :)

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  3. Love....... Hmmmmmmmmmmmmmmmm

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