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Tuesday, October 12, 2010

है ज़रूर कोई जादू सा इन आँखों में


है ज़रूर कोई जादू सा इन आँखों में

          जो देखता वह आईने से भी जलता हूँ

या तो मैं मचलने को डूबता हूँ

          या शायद डूबने को मचलता हूँ

अपना अनुभव ज़रूर बतायें

पड़ोसी

आग लगी थी, चारों और धुआँ धुआँ था कहाँ जाता, इधर खाई तो उधर कुआँ था लूटाके सब हसा मैं बैठ अंगारों पर राख पर बैठ पड़ोसी जो रो रहा था