थाम के उंगली
मेरी तू चला है
मेरे कंधो की सवारी
भी तुझे मिली है
जब जब गिरा
तू उठाया है मैंने
भटका तू जब
राह दिखाया है मैंने
है खुशी यह
मुझको कि मैं
तेरे सफ़र मे
काम आया
मलाल रह जाएगा अगर तू मेरी
उंगली ना छोड़
पाया
मैं अब हूँ
पर मैं रहूँगा
कब तक?
तेरे सवालों को हल
मैं करूँगा कब
तक?
मेरे बारे मे
तेरा नज़रिया
बदलेगा कब?
तेरी ज़िंदगी मे मेरा
दखल रुकेगा कब?
मैं साथ हूँ
पर अगर तू
मेरा बन के
रहा साया
मलाल रह जाएगा अगर तू मेरी
उंगली ना छोड़
पाया
पल पल तू
देखे क्यूँ मेरी
ही ओर?
चलेगा कब तुझ
पे खुद का
ही ज़ोर?
यह सिलसिला क्या यूँ
ही चलता रहेगा?
मेरे पास आके
तू यूँ ही
रोता रोहेगा?
मेरी सोहबत मे लग
रहा तू खुद
को ना खोज पाया
मलाल रह जाएगा अगर तू मेरी
उंगली ना छोड़
पाया
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