Tuesday, January 30, 2018
Friday, June 30, 2017
बात का बतंगड़ बन सकता है
चुप रह, खामोश रह कि एक झोंका भी बवंडर बन सकता है
सोच समझ कर बात कर, 'गणेश', कि बात का बतंगड़ बन सकता है
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सोच समझ कर बात कर, 'गणेश', कि बात का बतंगड़ बन सकता है
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Saturday, June 24, 2017
बचपन कहाँ चला गया
मा की लॉरी से, ममता की डोरी से
दादी की गोदी से, मिट्टी की घोड़ी से
हाथ छुड़ा गया
बचपन, कहाँ चला गया
कहाँ गयी वह पीपल की डाली
गली का बगीचा, ग़ुस्सेल माली
कहाँ गयी वह प्यारी कहानी
राजा की बातें, महलों की रानी
कौन सी ईमली को अब कंकर मारु
किस पनघट को घंटो निहारू
किस पंछी के अब पीछे भागु
किस सोए कुत्ते को अब लात मारु
यूँ ही घूमने से, मस्ती में झूमने से
बेवजह नाचने से, बेवजह रूठने से
हाथ छुड़ा गया
बचपन, कहाँ चला गया
कड़ी धूप में नदी में नहाना
रिमझिम बारिश का पानी उछालना
बरामदे पे गुज़रे सर्दी के वह दिन
चाँद देखते हुए रास्ते नापना
भागते भागते ज़ोरों से गिर जाना
कोई देखा या नहीं पता लगाना
फिर खुद को खुद ही संभालना
गुस्सा ज़रा सा ज़मीन पर दिखाना
मासूमियत से, घबराहट से
बदमाशियों से, शैतानियों से
हाथ छुड़ा गया
बचपन, कहाँ चला गया
मा की लॉरी से, ममता की डोरी से
दादी की गोदी से, मिट्टी की घोड़ी से
हाथ छुड़ा गया
Friday, May 19, 2017
Thursday, May 4, 2017
उन्हे याद होगा
यूँ
ना मचल, ए दिल,
के उन्हे याद होगा
रह तू संभल के, दिल, के उन्हे याद होगा
सब का होता है तो तेरी भी दुआ का
होगा कुछ असर, ए दिल, के उन्हे याद होगा
रह तू संभल के, दिल, के उन्हे याद होगा
सब का होता है तो तेरी भी दुआ का
होगा कुछ असर, ए दिल, के उन्हे याद होगा
Thursday, April 20, 2017
मुझसे मुखातिब होना
बातों में अदब ज़रा सी आ जाए तो
मुझसे मुखातिब होना
“ना” बर्दाश्त करने की हिम्मत आ जाए तो
मुझसे मुखातिब होना
हम जब मिले तो सिर्फ़ तुम ही
नहीं रह जाओगे
“हम” में मुझे भी शामिल कर पाए तो
मुझसे मुखातिब होना
Tuesday, April 18, 2017
जवाब क्यूँ देते नही बनता?
जलजले को आफताब क्यूँ देते नहीं बनता?
लुटेरों को हिसाब क्यूँ देते नहीं बनता?
मेरे ईमान पर कई सवाल उठाने वाले
अब तुझ से एक जवाब क्यूँ देते नही बनता?
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पड़ोसी
आग लगी थी, चारों और धुआँ धुआँ था कहाँ जाता, इधर खाई तो उधर कुआँ था लूटाके सब हसा मैं बैठ अंगारों पर राख पर बैठ पड़ोसी जो रो रहा था
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देखा है कई बार सूरज को पीला पड़ते हुए, देखा भी है तेरे चेहरे को गुलाबी रंग ओढ़ते हुए, यह आलम है अब के याद नहीं श्याम होती की नहीं, प...
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आग लगी थी, चारों और धुआँ धुआँ था कहाँ जाता, इधर खाई तो उधर कुआँ था लूटाके सब हसा मैं बैठ अंगारों पर राख पर बैठ पड़ोसी जो रो रहा था
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तेरी आँखों में मेरी एक छवि तो दिखने दे तेरे दिल में मेरी एक याद तो टिकने दे रुक जा ज़रा जाने से पहले मेरी आत्मकथा को बिकने दे तेरे ...