Friday, October 14, 2011

मन ऊब जाता है अक्सर ऐसे किस्सों से


देखा  किये, मिलना  हुआ, समझे  भी  एक  दुसरे  को  हम, 
लगा  मैं  उनकी  और वह  मेरी   ज़रुरत  हो  जैसे! 
दिन  बीते,  महीने  बीते , फिर  आयी  एक  शाम और वह  पल,
जो  फिर से अनजान  बनाने   का  महूरत  हो  जैसे!

मन  ऊब  जाता  है  अक्सर  ऐसे  किस्सों  से, 
बेमतलबी  बातों  से,  मतलबी  रिश्तों  से!

DEKHA KIYE, MILNA HUA, SAMJHE BHI EK DUSRE KO HUM,
LAGA MAIN UNKI AUR WOH MERI ZAROORAT HO JAISE!
DIN BEETE, MAHINE BEETE, PHIR AAYI EK SHAAM AUR WOH PAL,
JO PHIR SE ANJAAN BANANE KA MAHURAT HO JAISE!

MAN OOB JATA HAI AKSHAR AISE KISSON SE,
BEMATLABI BATON SE, MATLABI RISHTON SE!

अपना अनुभव ज़रूर बतायें

3 comments:

  1. बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति , बधाई.


    कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारने का कष्ट करें, आभारी होऊंगा .

    ReplyDelete